शिवजी के गणों से पार्वती-गण गणेशजी का विवाद

गतांक से आगे, चतुर्थ कुमार खण्ड प्रारम्भ, चौदहवां अध्याय, कथा-प्रसंग     

             ब्रह्माजी कहते हैं कि, अब वे सब गण शिवजी की आज्ञा से वहां जाकर उस द्वारपाल से उसका परिचय पूछने और यह कहने लगे कि, यदि तू जीना चाहता है तो यहां से दूर हो जा। इस पर गणेशजी क्रुध हो हाथ में दण्ड लिये उन गणों से निर्भय होकर बोले कि तुम सब यहां से दूर चले जाओ। मेरा विरोध करना अच्छा नहीं है। गणेशजी के ये वचन सुन कर शिवजी के गण हंसने लगे और पुनः क्रुध होकर बोले- हम सब शिवजी के श्रेष्ठ गण हैं। तुमको यहां से हटाने के लिए ही आये हैं। अब तक हमने तुमको भी एक गण मान कर ही छोड़ दिया है नहीं तो मार दिये गये होते। अतः क्यों मरना चाहते हो, भाग जाओ। क्रमशः

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